एक जंगल था। जंगल मे ज्यादा बारिश होने ने दूर दूर तक कुछ भी दिखाई नही देता था। उस समय लोमड़ी भी जंगल मे भोजन की तलाश उदर- इदर भटक रही थी। लोमड़ी थक कर जंगल मे एक पेड़ के नीचे जा कर बैठ गई।
अचानक उसकी नजर ऊपर गई, पेड़ पर एक कौआ बैठा हुआ था। उसके मुंह मे रोटी का एक टुकड़ा था।
कौआ को देख लोमड़ी के मुंह मे पानी भर आया। वह कौवे से रोटी छीनने के उपाय सोचने लगा।
तबी उसने कौवे को कहा , " कौआ भाई ! मेने सुना है कि आप बहुत अच्छा गीत गाते हो। क्या मुझे गीत नही सुनाओगे ?
कौआ अपनी प्रशंसा को सुनकर बहुत खुश हुआ। वह लोमड़ी की बातों में आ गया। गाना गाने के लिए उसने जैसे ही अपना मुंह खोला रोटी का टुकड़ा नीचे गिर गया।
लोमड़ी ने झट से वह टुकड़ा उठाया और वहा से भाग गई, और कौवे गीत गाता रहा!
जब कौआ ने पेड़ के नीचे देखा तो कोई नही था। ना लोमड़ी ना रोटी का टुकड़ा। अब कौआ अपनी मूर्खता पर पछताने लगा।
शिक्षा / moral = यह छोटी सी कहानी हमें स्पष्ट संदेश देती है कि हमे हमेशा झूठी प्रसंशा से बचना चाहिए।
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