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दो मेंढक, प्रेरणा दायक कहानी!

        यह एक प्रेरणा दायक कहानी है।                                                                           एक तालाब में दो मेंढक रहा करते थे। एक का नाम सोनू ओर दूसरे का नाम मोनू था। दोनों बहोत अच्छे दोस्त भी थे। यह तालाब हमेंशा के लिए हरा-भरा पानी से रहता था। लेकिन कुछ सालों से अच्छी बारिश न होने से तालाब में पानी कम होने लगा। 



                              तालाब का सारा पानी सूख गया था। मगर तालाब में एक गढ़ा में पानी भरा हुआ था। वह भी कुछ दिन में सुख जाने वाला था।                                      सोनू ने मोनू से कहा..... मोनू अभी समय है चलो बाहर चले जाते है।

        मोनू बोला.... तुजे जाना है तो जा में यही रहुगा।

       सोनू ने गढ़े से निकलने के लिए छलांग लगाने लगा। सोनू छलांग लगता ओर गिर जाता, बार बार सोनू गिरता रहता था।।                                                                         यह देख मोनू बोला.....क्यों मेहनत कर रहे हो, कुछ दिन में बारिश होगी पानी गढ़े में भरने से हम अपने आप बाहर आ जायेंगे।                                                       यह सुन सोनू को गुस्सा आया और पूरी ताकत से छलांग लगाई और गढ़े के ऊपर सोनू चला गया यह देख मोनू को आश्चर्य हुआ।           सोनू... बाहर जाकर मोनू को थेँकयू कहा,,,, ओर अपने साथ ऊपर आने को कहा पर मोनू तो बारिश ही आश में बैठा रहा।

         कुछ दिन बीत गए गढ़े का सारा पानी सूख गया। मोनू दो से चार दिन गढ़े में जिंदा रहा, भूख, प्यास से मोनू का बुरा हाल हो गया। पानी न मिलने मोनू की हालत खराब हो गई। मोनू भी गढ़े से  बहार निकलने की कोशिश करने लगा पर कमजोरी से वह छलांग नही लगा पा रहा था। मोनू एक दिन बाद प्यास से मर गया।

         सिख : छोटी या बड़ी मुसीबत आने पर भगवान के भरोसे बैठे रहने से अच्छा है कि मुसीबत से बाहर निकलने की कोशिश करे, ना कि मोनू की तरह दूसरे पर भरोसा कर के बैठे रहे। 

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